Sunday, March 8, 2009

इक खत कविता की शक्ल में


आज गुरुजी (अजित कुमार-साहित्य व पत्रकारिता से जुड़े पुराने लोग इन्हें खूब जानते हैं) के यहां जाना हुआ। वहां दीवार पर टंगी अंग्रेजी की इक कविता दिखी। खूब पढ़ा यानी कई दफा। अब आपके नजर-

I love you
Because
I love you
Because it would be
Impossible for me not
To love you, I love you
Without question,
Without calculation
Without reason
Good or bad, faithfully,
With all my heart
And soul, and
Every faculty

वैसे यह पत्र है जो Jyliette Drouet ने वर्ष 1833 में Victor के नाम लिखा था।

5 comments:

गिरीन्द्र नाथ झा said...

आपने लिखा-वैसे यह पत्र है जो Jyliette Drouet ने वर्ष 1833 में Victor के नाम लिखा था।

पर आज क्या हमेशा प्रासंगिक रहेगा।

nisha said...

It’s Beautiful, no word at all.

mehek said...

bahut sundar

gargi said...

so sweeeeeeet.

KAUSHAL said...

Bahut achchha, hriday ko chhoone wali panktiyan hain. yah desh aur kaal se pare sachche pyar(true love)ko paribhashit karne wali sarvakalik aur saarvabhaumik panktiyan hain.