गंगा के तट से यमुना के किनारे आना हुआ, यानी भागलपुर से दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ीमल कालेज से पढ़ाई-वढ़ाई हुई। कैंपस के माहौल में ही दिन बीता। अब खबरनवीशी की दुनिया ही अपनी दुनिया है।
अवमूल्यन : कविता – सतीश सिंह
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पता नहीं
कब और कैसे
धूल और धुएं
से ढक गया आसमान
सागर में मिलने से पहले ही
एक बेनाम नदी सूख़ गई
एक मासूम बच्चे पर
छोटी बच्ची के साथ
बलात्कार करने का
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Mohalla Live
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Mohalla Live
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हमें बुलाती है दुनिया हमीं नहीं जाते
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आज मुन्नवर राना को पढ़ने का बहुत मन किया तो नेट को खंगाला। कविता कोष पर वह
मिले। उन्हें पढ़ते वक्त पाठक एक अंश में खुद को भी पढ़ता है, ऐसा मेरा मानना
है। ब...
जरूरी है छद्म-सेक्युलरवादियों से बच कर रहना
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चुनाव का मौसम आता है और हमारे वामपंथी बुध्दिजीवी, कांग्रेसी पाखण्डी और पंच
सितारा होटलों में रहने वाले लोग तथाकथित समाजसेवी सेक्युलरिज्म पर अपना ज्ञान
बघ...
1 comments:
सुन्दर कविता है।
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