Thursday, October 9, 2008

झुमरीतिलैया है या 'झूम री तिलैया'

झारखंड के झुमरीतिलैया शहर के किस्से बड़े निराले हैं, खासकर फिल्मी गीतों को लेकर। कहा जाता है कि इस इलाके से केवल फरमाइशी गीतों की लहरें उठती हैं। रेडियो सिलोन (श्रीलंका) हो या फिर विविध भारती, इन रेडियो स्टेशनों से जब भी गीत प्रसारित होते हैं तो यहां के लोग मचल उठते हैं।


तिलैयावासी संजीव बर्नवाल बताते हैं, "आप इस छोटे से शहर में घूमें। तब आपको पता चलेगा कि फिल्मी गीतों के कितने कद्रदान यहां आकर बस गए हैं।" पहाड़ी पर बसे तिलैया शहर ने फरमाईशी गीतों के विविध कार्यक्रमों के बूते अपनी खास पहचान बनाई है। एक समय कहा जाने लगा था कि फरमाईशी गीतों के कार्यक्रमों को तिलैया वालों ने हिट कर दिया है, जिसमें एक महत्वपूर्ण नाम रामेश्वर प्रसाद बर्नवाल का


रामेश्वर बर्नवाल अब नहीं रहे लेकिन रेडियो सिलोन (श्रीलंका)और विविध भारती का पता लिखा पोस्टकार्ड अब भी उनकी आलमारी में पड़ा है। उनकी पत्नी द्रोपदी देवी ने बताया, "मेरे पति गीतों के बड़े शौकीन थे और फिल्मी गीतों को खूब सुनते थे।"


उन्होंने कहा, "साठ और सत्तर के दशक में जिन-जिन रेडियो स्टेशनों से फरमाईशी गीतों के कार्यक्रम प्रसारित होते थे, उन सभी स्टेशनों पर एक-एक पोस्टकार्ड भेजना उनका रोज का काम था।"


रामेश्वर के बेटे संजीव ने बताया, "पिताजी बताते थे कि यह प्रक्रिया खेल-खेल में शुरू हो गई। उन दिनों गीत सुनने की अपेक्षा रेडियो में अपना व अपने शहर का नाम सुनना लोगों को अधिक रोमांचित करता था। धीरे-धीरे फरमाईशी गीतों के कार्यक्रमों को सुनना तिलैयावासियों की आदत हो गई।"


हजारीबाग के निकट बसे इस शहर में सन सत्तर के आसपास 'झुमरीतिलैया रेडियो श्रोता संघ' का गठन किया गया था। गंगा प्रसाद, मनोज बागरिया, राजेश सिंह, अर्जुन साह जैसे लोग इसके सदस्य

बाद के दिनों में फरमाईशी गीतों को सुनने का ऐसा जादू चढ़ा कि लोग टेलीग्राम के माध्यम से भी पसंदीदा गीतों को बजाने की मांग करने लगे। इसकी शुरुआत भी रामेश्वर ने की थी। संजीव ने बताया कि सबसे पहले उन्होंने 'दो हंसों का जोड़ा बिछड़ गया रे'(फिल्म-गंगा यमुना) गीत सुनने के लिए विविध भारती को टेलीग्राम किया था।


एक समय ऐसा भी कहा जाने लगा था कि हिन्दी फिल्मों का चलताऊ संगीतकार भी झुमरीतिलैया के श्रोताओं के बल पर सुख की नींद सोता है। आखिर ऐसा हो भी क्यों न! लोग इस शहर को झुमरीतिलैया की जगह 'झूम-री-तिलैया' जो कहने लगे हैं।

4 comments:

rajesh said...

क्या लिखे हो यार, हर जगह दिख रहा है। मजा आ गया

सतीश पंचम said...

अच्छी जानकारी दी।

लवली said...

rochak jankari..maine kabhi dhyan nahi diya tha aise..dhnyawad

Ravi said...

आगामी दीवान-ए-सराय में पढ़िए झुमरी तिलैया और मजनूँ का टीला पर विशेष आयोजन.

शुक्रिया
रविकान्त