भारतीय सिनेमा का सिरमौर कुंदनलाल सहगल 18 जनवरी 1947 को इस दुनिया को अलविदा कह गए थे। सहगल की मृत्यु के बाद संगीतकार नौशाद अली ने उनके संबंध में कुछ यूं कहा था -
सदाएं मिट गई सारी सदा ए साज बाकी है
अभी दुनिया ए मौसीकी का कुछ एजाज बाकी है
जो नेमत दे गया है तू वो नेमत कम नहीं सहगल
जहां में तू नहीं, लेकिन तेरी आवाज बाकी है।
नौशाद मेरे दिल को यकीं है ये मुकम्मिल
नगमों की कसम आज भी जिंदा है वो सहगल
हर दिल में धड़कता हुआ वह साज है बाकी
वो जिस्म नहीं है मगर आवाज है बाकी
सहगल को फरामोश कोई कर नहीं सकता
वो ऐसा अमर है कभी मर नहीं सकता।
महज 13 की उम्र में सीने पर खाई गोली, कहानी बिहार के बाल शहीदों की
-
आज हम जिस खुली हवा में सांस ले रहे हैं और लोकतंत्र में अपनी बात रखने की
आजादी का अधिकार रखते हैं, उसके पीछे लाखों स्वतंत्रता सेनानियों का संघर्ष,
त्याग और ...
4 days ago

1 comment:
बाजार की दौड़ मं हर अच्छे को भूल रहे लोगों को कुंदन लाल सहगल जैसे महान लोगों कीयाद दिलाने के लिए शुक्रिया भैया।
हम तो अब सब को भूलने ही लगे हैं।
Post a Comment